कॉरपोरेट (कंपनी) और मीडिया
PIC CREDIT:- @FORBES बीते कुछ दशक में मीडिया का विस्तार जिस प्रकार हुआ है उससे टीवी चैनलों, अखबारों और रेडियो स्टेशनों की संख्या लगातार बड़ी है, लेकिन इसी दौरान हम देखें तो यह साफ पता चलता है की बड़े कॉरपोरेट घरानों की, मीडिया में दिलचस्पी बढ़ी है और इसमें वे खुलकर निवेश कर रहे हैं भारत में जो मीडिया का नया ट्रेंड है उसमें काफी संख्या में छोटे और मझोले चैनल और अखबार भी शुरू हुए हैं लेकिन प्रसार के मामले में बड़े मीडिया समूह के सामने वह टिक नहीं पाते। लिहाजा कॉरपोरेट के साथ मीडिया के संबंध से 2 सवाल उठ रहे हैं। पहला यह कि क्या पुनर्सिप का यह पैटर्न पत्रकारिता के लिए चिंताजनक है और दूसरा यह कि क्या बड़े कॉरपोरेट के मीडिया में उतरने से छोटे समूहों के लिए खतरे की घंटी बजी है। अमेरिका में 6 मीडिया समूह का वहां के 90 फ़ीसदी कंटेंट पर कब्जा है। क्या ऐसी चैनल से बहुलता गायब होने की आशंका बढ़ी है, क्या मार्केट में जो बड़ी मछली होगी वह पूरे तालाब पर राज करेगी। आज के युग में उभरते बाजार में नया रिलेशन ने जगह ले लिया है। जिसमें प्राइवेट ट्रीटी या दो कंपनियों के बीच होने वाले समझौते प्र...