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जीन्स के जेबों में गोल-गोल छोटे-छोटे बटन क्यों होते हैं, क्या आप जानते हैं?

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यह बात आपको अचंभित कर सकती है पर बता दें कि जींस का आविष्कार मजदूरों के लिए किया गया था। ऐसा इसलिए क्योंकि ज्यादा काम करने की वजह से मजदूरों के कपड़े अक्सर हट जाया करते थे। साल 1850 तक जीन्स बहुत अपने मजबूती की वजह से मशहूर हो गए थे लेकिन जीन्स में अभी भी एक समस्या थी वह यह कि जींस की जेबें बहुत जल्दी फट जाया करती थी। उस समय जींस का ज्यादातर इस्तेमाल मिलों, फैक्ट्रियों, खदानों में काम करने वाले मजदूरों, द्वारा किया जाता था। ऐसे में उनके द्वारा कड़ी मेहनत और जेबों में टूल्स रखने के चलते या तो जेब फट जाया करते थे या उनकी सिलाई खुल जाया करती थी। इसी के चलते जैकब डेविस नाम के दर्जी ने एक बार जींस में बटन लगा दिया। इससे यह लाभ देखने को मिला की जींस अब मजबूती के साथ साथ सुंदर भी दिखने लगा था। साल 1870 में जैकब दर्जी ने इसे पेटेंट करवाने की कोशिश की, लेकिन उसके पास पेटेंट के लिए लगने वाली बड़ी राशि नहीं थी। इसके बाद उसने लगभग 3 साल बाद लेवी कंपनी के साथ एक समझौता किया और लेवी कंपनी ने इसे अपने नाम पर पेटेंट करवा लिया। आपको बता दें कि इस साल 1880 में यह पेटेंट पब्लिक हो गया और अब इ...

UNO (UNITED NATION ORGANISATION)

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संयुक्त राष्ट्र संघ     संयुुक्त रााष्ट्र संंघ UNO एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जिसकी स्थापना वर्ष 1945 को अक्टूबर 24 को द्वितीय विश्वयुद्ध(1939 से 1945, लगभग 7 साल) के समापन के बाद हुई थी। इस युद्ध का समापन जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर अमेरिका द्वारा गिराए गए परमाणु बम के रूप में हुआ, जिस त्रासदी के निशान आज भी जापान में देखे जा सकते हैं। क्या यह संगठन एकाएक विश्व पटल पर अवतरित हुआ? ऐसा नहीं है कि इस संगठन का निर्माण एकाएक द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद हो गया हो और यह संयुक्त राष्ट्र संघ के रूप में उभर आया हो। ऐसे अंतरराष्ट्रीय संगठन का निर्माण प्रथम विश्वयुद्ध (1914 से 1918, लगभग 5 साल) के बाद बनाया गया था। युद्ध के परिणामों और उसकी त्रासदी को देखते हुए प्रथम बार अंतरराष्ट्रीय संगठन के रूप में किसी संगठन की आवश्यकता का अनुभव किया गया जिसके बाद वर्ष 1919 में  राष्ट्र संघ  बनाने का निर्णय लिया गया पर यह अपने उद्देश्य में पूर्ण नहीं हो सका और द्वितीय विश्वयुद्ध होते ही इसकी महत्वता भी खत्म हो गयी क्योंकि इस संगठन का मुख्य उद्देश्य था कि  इस संगठन का मुख...

जीवन ka सार

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    जीवन अंतड़ियों में जकड़ है, पर मन में खटास है,, एक पल की जिंदगी में, न घर है और न घनश्याम है,, जीने की चाहत है, पर किराए की किल्लत है,, इस जीवन के जीवनी में अब, बस रुखसद होने की रवायत है,, बुझे मन से चला है वो, अब कर्म का झोला लिए,, कि, लालची बना रहा, इस संसार में किसके लिए,, एक पल की जिंदगी में, न घर है और न घनश्याम है,, Photo credit:- Google photo